हम से टकराने की गलती मत करना,क्योंकि आग से खेलने वालों की राख बनते देर नहीं लगती।
शामे कटती नहीं और साल गुज़रते चले जा रहे है!
हमे तो अपनी किस्मत पर भरोसा कुछ इस कदर है,
ठंड की रात भी दुशाला ओढ़ रही थी चांदनी का कुहरे के साए में
ना शिकायत है ना कोई गिला,बस अब अकेले जीना भी लगने लगा है सिला।
फर्क बस इतना है कि कोई समय पर समझ जाता है,
“डरते क्यों हो पागल तुम्हारी ही तो हूँ!” ✨
रख लो मुझे कहीं तुम अपनी बाहों में छुपा कर,
बस बचपन की जिद्द समझौतों में बदल जाती हैं
वो LATEST SHAYARI COLLECTION रिश्ते ही क्या जो सिर्फ़ नाम के रह जाए।
बदलते लोगो के बारे में आखिर क्या कहूँ मै?
दिल कहता है कि ये तजुर्बा दोबारा कर लूं l
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वर्ना दोस्ती भी प्यार से कम नहीं होती !!